प्रतिम्मूषक को गज-आनन्द का मूषक कहें कैसे
जो अन्तर कम न कर पाये उसे
धावक कहें कैसे
जो नौकायन तो सिखलाये, तरण
करना न सिखलाये
उसे तारक तो कह सकते हैं उद्धारक कहें कैसे
वो जो दो पंक्तियों के
मध्य का विवरण न पढ पाये
उसे पाठक तो कह सकते हैं सम्पादक कहें कैसे
सयानों के विधानों के लिये
उपयोग हो जिसका
उसे पूरक तो कह सकते हैं परि-पूरक कहें कैसे
प्रभा दृष्टव्य हो फिर भी
प्रभावित हो न जिसका मन
उसे दर्शक तो कह सकते हैं दिग्दर्शक कहें कैसे
जिसे सब मान्य तो करते हों
लेकिन स्वार्थ के अनुसार
उसे नायक तो कह सकते हैं अधिनायक कहें कैसे
उसे तारक तो कह सकते हैं उद्धारक कहें कैसे
उसे पाठक तो कह सकते हैं सम्पादक कहें कैसे
उसे पूरक तो कह सकते हैं परि-पूरक कहें कैसे
उसे दर्शक तो कह सकते हैं दिग्दर्शक कहें कैसे
उसे नायक तो कह सकते हैं अधिनायक कहें कैसे
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