प्रेम सरिता में उतर कर डूब कर अनुराग में
आइये कुछ रत्न जड़ लें
प्रेरणा की पाग में
बावरे मन! रुक तनिक, साँसों की सरगम पर थिरक
छुट न जाये हाथ से सौभाग्य भागमभाग में
जब शहद उपलब्ध है तो क्यों
शिकंजी चाखिए
वास्तविक सन्तुष्टि मिलती ही नहीं खटराग में
तत्व के जैसा विरल अनुभव
पदार्थों में कहाँ
हमको तो दिखते हैं छप्पन भोग रोटी-साग में
आधुनिकता के वकीलो आधुनिक तब
भी थे हम
जब कराया था जगत को सृष्टि-दर्शन झाग में
छुट न जाये हाथ से सौभाग्य भागमभाग में
वास्तविक सन्तुष्टि मिलती ही नहीं खटराग में
हमको तो दिखते हैं छप्पन भोग रोटी-साग में
जब कराया था जगत को सृष्टि-दर्शन झाग में
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