प्रीत की प्रतीत को पुनीत मानते नहीं
जिनको पूजते हैं उनकी रीत
मानते नहीं
गीत उनके गा रहे जो छोड़कर
चले गये
संग रह रहे हैं उनको मीत मानते नहीं
हम मनुष्य भी विचित्र कोटि
के मनुष्य हैं
जो अतीत है उसे अतीत मानते नहीं
राम जाने जाने कैसी भावना से
ग्रस्त हैं
युद्ध है कबूल बातचीत मानते नहीं
पंच तत्व हैं सुलभ अमोल रत्न
की तरह
पर स्वयं को हम अनुगृहीत मानते नहीं
संग रह रहे हैं उनको मीत मानते नहीं
जो अतीत है उसे अतीत मानते नहीं
युद्ध है कबूल बातचीत मानते नहीं
पर स्वयं को हम अनुगृहीत मानते नहीं
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