परिचय - नवीन सी. चतुर्वेदी

परिचय – नवीन सी. चतुर्वेदी

पिरामिडों की तरह थर पै थर बनाती हुई

 पिरामिडों की तरह थर पै थर बनाती हुई
विरह की पीर शिखर पर शिखर बनाती हुई
 
मैं अपने मन में बिछुड़ने के दृश्य बुनता हुआ
वो अपने मन में अधर पर अधर बनाती हुई 
 
मैं अपने मित्रों से हर बात को छुपाता हुआ
वो मेरे मित्रों को ही गुप्तचर बनाती हुई
 
मैं बार बार उसे सेविका समझता हुआ
वो बार बार मुझे मान्यवर बनाती हुई
 
मैं उस पलाश को पाषाणवत बनाता हुआ
वो मुझ कराल को भी गुलमोहर बनाती हुई

No comments:

Post a Comment