भय से ग्रस्त नहीं हैं लेकिन कब तक पीर छुपायें कान्हा
तुम्हीं कहो ऐसे ही कबतक
स्वयं को ही भरमायें कान्हा
पल-पल
बढ़ती जनसंख्या ने कण-कण में विष भर डाला है
कालीदह जैसे सिस्टम से कैसे पिण्ड छुड़ायें कान्हा
कालीदह जैसे सिस्टम से कैसे पिण्ड छुड़ायें कान्हा